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Chapter summaries
Read concise NCERT summaries and highlights for A Different Kind of School in Class 6 · English.
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Summary
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Chapter notes
“अ डिफरेंट काइंड ऑफ स्कूल” एक संवेदनशील और प्रेरणादायक अध्याय है, जो हमें नेत्रहीन बच्चों के एक विशेष स्कूल से परिचित कराता है। कहानी का वर्णन एक लड़का करता है जो पहली बार इस स्कूल में जाता है। वह स्वीकार करता है कि उसे थोड़ा संकोच और असहजता महसूस होती है क्योंकि उसने पहले कभी नेत्रहीन बच्चों के साथ समय नहीं बिताया। स्कूल को देखकर वह सोचता है कि वहाँ उदासी और असहायता का माहौल होगा, लेकिन अंदर जाकर उसका नजरिया पूरी तरह बदल जाता है। बाहर से स्कूल साधारण लगता है, पर उसकी शिक्षा-पद्धति और उद्देश्य अलग हैं।
स्कूल के हेडमास्टर लड़के का स्वागत करते हैं और बताते हैं कि यह स्कूल केवल पढ़ाई कराने के लिए नहीं है, बल्कि नेत्रहीन बच्चों को आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाने के लिए भी है। वे कहते हैं कि दया दिखाने से बच्चों को फायदा नहीं होता; उन्हें जीवन जीने के लिए कौशल और साहस चाहिए। हेडमास्टर की बातों से लड़के की जिज्ञासा बढ़ती है और वह इस स्कूल को सम्मान की नजर से देखने लगता है।
लड़का कक्षाओं में जाता है जहाँ बच्चे पढ़ रहे होते हैं। एक कक्षा में बच्चे ब्रेल लिपि पढ़ते हैं। वे किताबों को पास रखकर उँगलियों से उभरे हुए बिंदुओं को छू-छूकर पढ़ते हैं। लड़का जानता है कि ब्रेल नेत्रहीनों के लिए विशेष लिपि है जिससे वे स्पर्श के माध्यम से पढ़-लिख सकते हैं। लड़के को ब्रेल समझना कठिन लगता है, लेकिन वह हैरान रह जाता है कि बच्चे कितनी सहजता से पढ़ रहे हैं। यह दिखाता है कि दृष्टिहीनता सीखने में बाधा नहीं है।
दूसरी कक्षा में वह गणित करते बच्चों को देखता है। वे विशेष बोर्ड और पेग की मदद से संख्याएँ “महसूस” करके हल करते हैं। शिक्षक बहुत धैर्य से उन्हें समझाते हैं और स्पर्श, ध्वनि तथा अभ्यास के जरिए सीखाते हैं। लड़का समझता है कि इन बच्चों की स्मरण-शक्ति तेज़ है, सुनने की क्षमता विकसित है और वे ध्यान से सीखते हैं। पढ़ने का तरीका अलग है, पर बुद्धि और मेहनत किसी भी बच्चे जैसी ही है।
कक्षाओं के बाहर लड़का देखता है कि बच्चे स्कूल में कैसे चलते-फिरते हैं। कई बच्चे सफेद छड़ी (कैन) का उपयोग करते हैं, कुछ दीवार को हल्का छूकर रास्ता समझते हैं। लड़का सोचता था कि वे धीमे और डरे हुए होंगे, लेकिन वह आश्चर्यचकित होता है कि वे आत्मविश्वास से चलते हैं। वे रास्तों को याद रखते हैं, आवाज़ों से दिशा पहचानते हैं और हवा या कदमों से बाधाओं का अंदाज़ा लगा लेते हैं। कुछ बच्चे आँगन में खुशी-खुशी खेलते भी हैं। इससे लड़के को एहसास होता है कि दृष्टिहीनता ने उनके जीवन का आनंद नहीं छीना।
हेडमास्टर आगे बताते हैं कि स्कूल में बच्चों को जीवन-कौशल भी सिखाए जाते हैं। वे खुद कपड़े पहनना, आसपास सफाई रखना, और रोज़मर्रा के काम बिना मदद के करना सीखते हैं। उन्हें संगीत, कहानी-कहना और हस्तकला जैसी चीजों में भी प्रशिक्षित किया जाता है ताकि वे अपनी प्रतिभा दिखा सकें। शिक्षक उन्हें दया से नहीं, सम्मान और अनुशासन से पढ़ाते हैं। हेडमास्टर कहते हैं कि समाज अक्सर दिव्यांग लोगों को कमतर समझकर उनके लिए जीवन कठिन बना देता है। इसलिए इस स्कूल का उद्देश्य है कि बच्चे आत्मनिर्भर बनें और सम्मान के साथ समाज में योगदान दे सकें।
लड़का कुछ बच्चों से मिलता है और उनके सपनों के बारे में सुनता है। कोई शिक्षक बनना चाहता है, कोई संगीतकार, तो कोई दफ्तर में काम करने का सपना देखता है। उनके सपने सामान्य हैं, लेकिन उन्हें पूरा करने के लिए उनका साहस और मेहनत बहुत बड़ी है। लड़का अब उन पर तरस नहीं खाता, बल्कि गर्व और सम्मान महसूस करता है। उसे समझ आता है कि असली शिक्षा केवल किताबें नहीं, बल्कि चुनौतियों को आत्मविश्वास से सामना करना भी है।
स्कूल से लौटते समय लड़के का नजरिया बदल चुका होता है। वह अनुभव के लिए आभारी होता है। यह स्कूल “अलग” इसलिए है क्योंकि यह बच्चों को सिर्फ विषय नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और जीवन जीने की शक्ति सिखाता है। पाठ का संदेश साफ है—दिव्यांग बच्चों को बराबर सम्मान और अवसर मिलना चाहिए। दृष्टिहीनता शरीर की सीमा है, क्षमता या सम्मान की नहीं, और सही शिक्षा हर बच्चे को आत्मविश्वास से भरी जिंदगी जीने में मदद कर सकती है।
FAQs
Common questions students ask before revising this chapter.
Is this summary based on NCERT?
Yes. The summary follows the NCERT syllabus and keeps the key points students need for exams.
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How should I use this for exam prep?
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